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Wednesday, 23 December 2015

गुमनाम मुसाफिर सोनपुर मेले में

२२ दिसम्बर को सुबह करीब आठ बजे सोनपुर मेले में जाने के लिये घर से निकला l और ९ बजे के करीब पटना स्टेशन पहुँचा l वहाँ से  हाजीपुर वाली टेम्पू पकड़ी जिसने करीब १० बजे सुबह मुझे जदुआ उतार दिया l वहाँ से हाजीपुर स्टेशन करीब ३ किलोमीटर है और हाजीपुर से सोनपुर करीब ५ किलोमीटर l पटना से हाजीपुर की दुरी करीब २० किलोमीटर है लेकिन अभी ये रेल मार्ग से नहीं जुड़ा है यहाँ जाने के लिये गाँधी सेतु पुल को पार करना पड़ता है जोकी गंगा नदी के ऊपर बना है  l इसकी लम्बाई ५ किलोमीटर से कुछ अधिक है और इसका उद्घाटन १९८२ में तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी द्वारा किया गया था l ये देश का दूसरा सबसे बड़ा पुल है l 

जदुआ में प्रभात रहता है जोकी रिश्ते में मेरा भाँजा लगता है l उसके साथ वहाँ से बाइक पर बैठकर सोनपुर मेले में करीब ११ बजे पहुँचा l अब सोनपुर के विषय में बता दूँ कि इसे हरिहरक्षेत्र कहा जाता है और यहाँ हर साल पशु मेला लगता है जो एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला कहा जाता है l इस मेले की शुरुआत कार्तिक पूर्णिमा से होती है जोकी मार्गशीर्ष पूर्णिमा तक यानी करीब १ महीने तक रहता है l वहाँ पशु में गाय, घोड़े, हाथी आते ही है साथ ही कुत्ते, खरगोश आदि भी आते है l हम मेला समाप्ति के २ दिन पूर्व गये थे इसलिए गाय, हाथी आदि नजर नहीं आये l जो लोग उसे लाये थे वे उसे बेचकर या वापस लेकर जा चुके थे l खैर उसके अलावा भी मेले में देखने के लिये बहुत बहुत कुछ था l हम करीब ढाई बजे तक मेले में स्थित विभिन्न दुकानों में घुमे और हरिहरनाथ मंदिर भी गये l 
अब यहाँ से जुड़े महात्म्य के बारे में बताता हूँ l यहाँ ऐसी मान्यता है की यही पर कोनहारा घाट पर गज और ग्राह की लड़ाई हुई थी और भगवान् ने आकर ग्राह को मारकर गज के प्राण बचाये थे l लेकिन इस विषय में जब मैंने कुछ खोजबीन की तो मुझे आश्चर्यजनक जानकारी मिली l श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध में गज और ग्राह की लड़ाई का वर्णन मौजूद है l उसके अनुसार वह लड़ाई क्षीरसागर में स्थित १० हजार योजन ऊँचा त्रिकुट पर्वत के तराई में एक सरोवर के किनारे हुआ था l और ये चौथे मन्वंतर में हुआ था l अभी सातवाँ मन्वंतर चल रहा है l विष्णु पुराण के अनुसार एक मन्वंतर का मान होता है - ३० करोड़, ६७ लाख २० हजार वर्ष l उस गणना से वह लड़ाई करीब १ अरब साल पूर्व हुई होगी l खैर अब जिन स्थानों के बारे में ये माना जाता है कि वह गज ग्राह का लड़ाई क्षेत्र है उस विषय में वर्णन करता हूँ l सबसे पूर्व सोनपुर तो यहाँ पर कोई पर्वत नहीं है l हा हरिहरक्षेत्र का वर्णन जरुर आया भागवत पुराण में जहाँ पर राजर्षि भरत रहते थे जिनके नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा जोकी हिरण में आसक्त होने के कारण अगले जन्म में हिरण हुए और तीसरे जन्म में जड़ भरत l बिहार के सोनपुर के अलावा नेपाल में ही एक जगह है जिसके बारे में दावा किया जाता है कि वह गजेन्द्र मोक्ष स्थल है l इसके अलावा तमिलनाडु के कुमबाकोनम के निकट स्थित कपिस्थलम नामक जगह के बारे में ऐसा माना जाता है कि वहीँ पर गज और ग्राह की लड़ाई हुई थी और वहाँ उसी प्रकार गज की प्रार्थना पर भगवान् विष्णु ने आकर ग्राह को मारकर गज के प्राण बचाए थे l और वहाँ पर मंदिर भी बना है गजेन्द्र वरदराजा पेरूमल नामसे l 
इस प्रकार भारत में २ स्थल तथा नेपाल में एक स्थान के बारे में माना जाता है कि वहाँ गज और ग्राह की लड़ाई हुई l और सब जगह इसके पीछे समान घटना का वर्णन है l हाँ पर्वत कहीं नहीं है l वैसे अरबों साल में किसी जगह का भूगोल कितना बदल जाता है ये सहज ही समझा जा सकता है l जहाँ तक गजेन्द्र मोक्ष की बात रही तो मेरे समझ से घटनाओं की बार-बार पुनरावृति होती रहती है अतः ये घटना एक से अधिक बार हुई हो विभिन्न जगह पर तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है l हाँ अगर उस जगह के बारे में झूठा प्रचार किया गया हो तो बात अलग है l अब इस बात का निर्णय खुद न करते हुए की किस जगह पर गज और ग्राह की लड़ाई हुई इस पोस्ट को यहीं विराम देते हुए सोनपुर मेले की तस्वीरे देता हूँ l 

जदुआ 

जदुआ 

हाजीपुर का एक मन्दिर

हाजीपुर से सोनपुर जाते समय आने वाला पुल, बगल में गंडक नदी बह रही है  


इसी स्थान से सोनपुर मेला शुरू हुआ था 




घाट 

नौलखा मंदिर, सोनपुर  






























खुलने और बन्द होने वाला चाकू 




















बाँस का आचार कीमत १३०/किलो  








पिंजरे में बन्दर का बच्चा 


प्रभात 


जी हाँ यहाँ ५ रुपये में भी सामान बिक रहा था 










सब्जियों से इस प्रकार की आकृति काटने वाले मशीन की कीमत ३० रूपये थी 



हरिहरनाथ मंदिर  


प्रभात 

ये सभी सामान में प्रत्येक की कीमत १० रूपये थे l टॉर्च और लाइटर भी ठीक काम कर रहा था